Wednesday, August 13, 2008

दर्द का सैलाब हूँ

दर्द का सैलाब हूँ

इस अजनबी दुनिया में, अकेला एक खवाब हूँ,
सवालों से खफा, छोटा सा जवाब हूँ,

जो न समझ सके, उनके लिए ‘कौन?’,
जो समझ चुके, उनके लिए खुली किताब हूँ ,
सर उठाकर देखो, वो देख रहा है तुमको,
जिसको न देखा उसने, वो चमकता आफ़ताब हूँ,
आँख से देखोगे, तो खुश पाओगे,
दिल से पूछोगे, तो दर्द का सैलाब हूँ।

6 comments:

admin said...

दर्द के इस सैलाब को इस नाचीज का सलाम।

Udan Tashtari said...

बहुत उम्दा...वाह!

seema gupta said...

दिल से पूछोगे, तो दर्द का सैलाब हूँ।
"wah, beautiful

seema gupta said...

दिल से पूछोगे, तो दर्द का सैलाब हूँ।
"wah, beautiful

रश्मि प्रभा... said...

bahut badhiyaa....

http://anusamvedna.blogspot.com said...

इस अजनबी दुनिया में, अकेला एक खवाब हूँ,
सवालों से खफा, छोटा सा जवाब हूँ,

बहुत खूब कहा ......