Saturday, August 1, 2009

मगर सोना नही चाहते...




मोहब्बत मेरी राह नही है.
मुझे फूलों की चाह नही है.
बस एक बार आप मुझे दोस्त बना लें,
फ़िर मैं मर जाऊँ, मुझे परवाह नही है…

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आपको पाकर अब खोना नही चाहते,
इतना खुश होकर अब रोना नही चाहते।
ये आलम है हमारा आपकी जुदाई से,
आंखों में नींद है मगर सोना नही चाहते।

7 comments:

परमजीत बाली said...

bahut sundar rachanaa va muktak hain.

पी.सी.गोदियाल said...

मोहब्बत मेरी राह नही है.
मुझे फूलों की चाह नही है.
बस एक बार आप मुझे दोस्त बना लें,
फ़िर मैं मर जाऊँ, मुझे परवाह नही है…

अति सुन्दर भाव,!

‘नज़र’ said...

बहुत सुन्दर रचना है
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· चाँद, बादल और शाम

Harkirat Haqeer said...

आपको पाकर अब खोना नही चाहते,
इतना खुश होकर अब रोना नही चाहते।
ये आलम है हमारा आपकी जुदाई से,
आंखों में नींद है मगर सोना नही चाहते।

तौबा ....!!

बीमार पड़ जायेगें हजूर ....!!

Nirmla Kapila said...

आपको पाकर अब खोना नही चाहते,
इतना खुश होकर अब रोना नही चाहते।
ये आलम है हमारा आपकी जुदाई से,
आंखों में नींद है मगर सोना नही चाहते।
hotaa hai. bahut sundar badhaaI

काव्या शुक्ला said...

प्रेम भावना की सुंदर अभिव्यकित।
वैज्ञानिक दृ‍ष्टिकोण अपनाएं, राष्ट्र को उन्नति पथ पर ले जाएं।

'अदा' said...

आपको पाकर अब खोना नही चाहते,
इतना खुश होकर अब रोना नही चाहते।
ये आलम है हमारा आपकी जुदाई से,
आंखों में नींद है मगर सोना नही चाहते।
isko insomnia kahte hain doctor ko dikhaiye...ha ha ha ha
Bahut hi CUTE si abhivyakti hain..
pasand aayi hai..