सोये से ख्वाब
पत्थर के इन रास्तों पर,
फूलों की एक चादर है।
जब से मिले हो हम को,
बदला हर एक मंज़र है।
देखो जहाँ में नीले-नीले आसमाँ तले,
रंग नए-नए हैं जैसे घुलते हुए।
सोये से ख्वाब मेरे जागे तेरे वास्ते,
तेरे ख्यालों से है भींगे मेरे रास्ते।

तुम क्यूँ चले आते हो,
हर रोज़ इन ख्वाबों में।
चुपके से आ भी जाओ,
एक दिन मेरी बाहों में।
तेरे ही सपने अंधेरों में उजालों में,
कोई नशा है तेरी आंखों के प्यालों में।
तू मेरे ख्वाबों में जावाबों में सवालों में,
हर दिन चुरा तुम्हें मै लता हूँ ख्यालों में।
..........क्या मुझे प्यार है....
...रवि
http://mere-khwabon-me.blogspot.com/
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